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नयन
अधमुंदे

अधर अधखुले

लरज़े लाल कपोल

उस पर भी कुछ कमी दिखी तो बोल दिये दो बोल


दीवानों पर

क्या गुज़रेगी

तुमने कभी सोचा

कई बार मुड़ मुड़ कर देखा आधा घूँघट खोल



रचयिता : रामरिख मनहर


प्रस्तुति : अलबेला खत्री
























www.albelakhatri.कॉम


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1 comments:

    M VERMA said...

    आभार इस सुन्दर और रोमांटिक रचना के लिये

  1. ... on May 16, 2010 at 10:56 PM