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कवि-सम्मेलन की धारा में आज प्रस्तुत हैं

पुणे निवासी नवोदित रचनाकार

दिलीप शर्मा की एक नन्ही सी कविता



औक़ात


तुम हवा थी, ठीक थी

तूफान बनने की

क्या ज़रूरत थी ?

मैं तिनका था, तुच्छ था

वैसे भी उड़ जाता


रचयिता : दिलीप शर्मा

प्रस्तुति : अलबेला खत्री






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4 comments:

    ओशो रजनीश said...

    अच्छी पंक्तिया है .....
    अपने विचार प्रकट करे
    (आखिर क्यों मनुष्य प्रभावित होता है सूर्य से ??)
    http://oshotheone.blogspot.com/2010/09/blog-post_07.html

  1. ... on September 7, 2010 at 10:02 AM  
  2. संगीता पुरी said...

    बहुत खूब .. नन्‍हीं पर असरदार !!

  3. ... on September 7, 2010 at 10:13 AM  
  4. डॉ टी एस दराल said...

    बहुत खूब ।

  5. ... on September 7, 2010 at 10:25 AM  
  6. Shah Nawaz said...

    बहुत कम शब्दों में बहुत ही गहरी बात कह दी दिलीप शर्मा ji ne......बहुत खूब!

  7. ... on September 7, 2010 at 8:04 PM