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गजेन्द्र सोलंकी (दिल्ली)




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4 comments:

    Udan Tashtari said...

    अरे, जल्दी रुक गया...और भी तो सुनाओ!!

  1. ... on November 1, 2009 at 7:18 PM  
  2. डॉ टी एस दराल said...

    अलबेला जी, सौभाग्य से गजेन्द्र भाई के साथ मंच पर बैठने का अवसर मुझे भी मिला था.
    बहुत कमाल के कवि हैं. छंद में सुनाते हैं.
    लेकिन उनसे हास्य नहीं सुना.

  3. ... on November 1, 2009 at 9:47 PM  
  4. नीरज गोस्वामी said...

    पूरा क्यूँ नहीं सुनवाया...आधे में मजा कम आया...
    नीरज

  5. ... on November 2, 2009 at 4:59 AM  
  6. विनोद कुमार पांडेय said...

    अभी तक तो बस प्रणाम ही हो पाया था..आगे तो सुनने ही नही पाया...कुछ और पेश कीजिए ..वैसे जितना था वो भी बेहतरीन ..धन्यवाद!!

  7. ... on November 2, 2009 at 7:42 AM